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ग्वालियर 

एसटीपीआई - ग्वालियर 

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय-भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा एक विशिष्ट उद्देश्य 'सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रोत्साहित करने एवं वृद्धि करने' के लिए सन 1991 में स्थापित किया गया ।

एसटीपीआई का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है और इसके देशभर में 14 निदेशालय एवं  68 केंद्र हैं जिसमे से  60 केंद्र टायर -II /III शहरों में स्थित हैं ।

प्रयागराज

एसटीपीआई - प्रयागराज

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय-भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा एक विशिष्ट उद्देश्य 'सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रोत्साहित करने एवं वृद्धि करने' के लिए सन 1991 में स्थापित किया गया ।

एसटीपीआई का मुख्यालय नई दिल्ली है एवं इसके 68 केंद्र देश भर में फैले हुए हैं।

एसटीपीआई, भारत सरकार द्वारा तैयार की गई एसटीपी/ईएचटीपी योजना को लागू करने तथा आधारभूत संरचना सुविधाओं की स्थापना और प्रबंधन के उद्देश्य से लगातार काम कर रहा है ।

देहरादून

एसटीपीआई - देहरादून

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय-भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा एक विशिष्ट उद्देश्य 'सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रोत्साहित करने एवं वृद्धि करने' के लिए सन 1991 में स्थापित किया गया ।

एसटीपीआई का मुख्यालय नई दिल्ली है एवं इसके 68 केंद्र देश भर में फैले हुए हैं।

एसटीपीआई, भारत सरकार द्वारा तैयार की गई एसटीपी/ईएचटीपी योजना को लागू करने तथा आधारभूत संरचना सुविधाओं की स्थापना और प्रबंधन के उद्देश्य से लगातार काम कर रहा है ।

बजट 2021

Date: February 02, 2021

बजट 2021

हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने वाला है बजट 

तकनिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा भारत 

भिलाई

एसटीपीआई - भिलाई

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय-भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त सोसाइटी है जिसे इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार द्वारा एक विशिष्ट उद्देश्य 'सॉफ्टवेयर निर्यात को प्रोत्साहित करने एवं वृद्धि करने' के लिए सन 1991 में स्थापित किया गया ।

एसटीपीआई का मुख्यालय नई दिल्ली है एवं इसके 68 केंद्र देश भर में फैले हुए हैं।

एसटीपीआई, भारत सरकार द्वारा तैयार की गई एसटीपी/ईएचटीपी योजना को लागू करने तथा आधारभूत संरचना सुविधाओं की स्थापना और प्रबंधन के उद्देश्य से लगातार काम कर रहा है ।

बीते वित्त वर्ष में एसटीपी की पंजीकृत इकाइयों ने किया 4.21 लाख करोड़ रुपये का निर्यात

Date: June 06, 2020

बीते वित्त वर्ष में एसटीपी की पंजीकृत इकाइयों ने किया 4.21 लाख करोड़ रुपये का निर्यात

नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) के सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग को बढ़ावा देने के प्रयासों से एसटीपी की पंजीकृत इकाइयों का निर्यात 2019-20 में 4.21 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। एसटीपीआई के महानिदेशक ओमकार राय ने यह जानकारी दी। एसटीपीआई इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (मेइटी) मंत्रालय के तहत आने वाली स्वायत्त सोसायटी है। एसटीपीआई ने पांच जून को अपना 29वां स्थापना दिवस मनाया। राय ने बयान में कहा, ‘‘एसटीपी की पंजीकृत इकाइयो का निर्यात 2019-20 में 4,21,103 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। 1992-93 में यह मात्र 52 करोड़ रुपये था। पिछले तीन दशक के दौरान एसटीपीआई ने आईटी उद्योग को प्रोत्साहन तथा सॉफ्टवेयर निर्यात बढ़ाने के लिए काफी प्रयास किए हैं। यह देश की आर्थिक प्रगति में योगदान की एसटीपीआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’’ राय ने कहा कि एसटीपीआई देशभर में 21 से अधिक डोमेन केंद्रित विशिष्टता केंद्र (सीओई) स्थापित कर रहा है। इससे आने वाले समय में अखिल भारतीय स्तर पर एक गतिशील स्टार्ट-अप पारिस्थतिकी तंत्र उपलब्ध हो सकेगा।
 

एसटीपीआई महानिदेशक डॉ. ओंकार राय ने कहा- स्टार्टअप से बढ़ाएंगे छोटे शहरों में रोजगार

Date: January 13, 2020

एसटीपीआई महानिदेशक डॉ. ओंकार राय ने कहा- स्टार्टअप से बढ़ाएंगे छोटे शहरों में रोजगार


भारत फिलहाल सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में सालाना 136 अरब डॉलर का निर्यात कर रहा है। इसमें 90 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी सेवाओं की है, जबकि सॉफ्टवेयर उत्पादों का निर्यात महज 8.2 अरब डॉलर का है। सरकार की मंशा आईटी क्षेत्र में उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ाना है।

इसकी जिम्मेदारी सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (एसटीपीआई) को दी गई है। अमर उजाला के शिशिर चौरसिया ने एसटीपीआई महानिदेशक डॉ. ओंकार राय से इस जिम्मेदारी और योजना पर बातचीत की। पेश है अंशः

प्रश्न- प्रधानमंत्री चाहते हैं कि छोटे शहरों में भी आईटी स्टार्टअप सामने आएं, ताकि युवाओं को उनके शहरों या घर के आसपास ही रोजगार मिले। इसके लिए एसटीपीआई क्या कर रहा है?

उत्तर- हमने इस संकेत पर अमल शुरू कर दिया है। हमारी कोशिश है कि देश के हर हिस्से में स्टार्टअप शुरू हो। हमने देखा है कि देश में न तो प्रतिभा की कमी है और न ही अवसर की। जरूरत बस सही दिशा-निर्देश मिलने की है।

युवाओं को कॉलेज से निकलते ही वैसा माहौल मिले, सुविधा मिले तो वे नौकरी ढूंढने के बजाय दूसरों को नौकरी देने की तरफ बढ़ेंगे। इसी उद्देश्य को सामने रखकर देशभर में 21 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) विकसित कर रहे हैं, जहां युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से सुविधाएं मिलेंगी।

प्रश्न- एसटीपीआई को अभी तक देश के सॉफ्टवेयर निर्यात को बढ़ाने में कितनी सफलता मिल सकी है?

उत्तर- हम इस दिशा में कितने सफल हुए हैं, इसका जवाब आंकड़ों से समझिए। एसटीपीआई का गठन 1991 में हुआ था और उस समय देश में आईटी से जुड़ा कुल राजस्व महज 52 करोड़ रुपये था। हमने सॉफ्टवेयर और इससे जुड़ी सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इकोसिस्टम तैयार किया। पिछले साल देश का आईटी निर्यात 136 अरब डॉलर पहुंच गया। हम गर्व से कह सकते हैं कि इसमें से करीब आधा निर्यात एसटीपीआई से जुड़ी फर्मों या कंपनियों का है।

प्रश्न- छोटे शहरों में इंक्यूबेशन सेंटर की काफी कमी महसूस की जा रही है। क्या इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी?

उत्तर- हम सीओई में इंक्यूबेशन सेंटर का भी प्रवधान कर रहे हैं। अक्सर देखा जाता है कि कॉलेज से निकलने वाले युवा तकनीकी रूप से सक्षम हैं। उनके पास आइडिया है लेकिन उसे धरातल पर उतारने केलिए संसाधन नहीं हैं। हम 2-4-10 सीटर कंपनी को इंक्यूबेशन सुविधा उपलब्ध करा रहे हैं। हमने हर राज्य में कम से कम एक केंद्र तो बना ही रखा है। इस समय हमारे 59 केंद्र चल रहे हैं। वहां भी यह सुविधा मिल रही है। हम इसमें लगातार बढ़ोतरी कर रहे हैं। अब किसी महानगर पर फोकस करने की बजाय हम छोटी-छोटी जगह इंक्यूबेशन सेंटर बना रहे हैं। यही नहीं, हम अगली पीढ़ी के इंक्यूबेशन सेंटर की भी सुविधा उपलब्ध कराने वाले हैं। अब भारतीय स्टार्टअप दुनिया के अन्य देशों से पीछे नहीं रहेंगे।

प्रश्न- अभी तक जो इंक्यूबेशन सेंटर बनाए गए हैं, उनका प्रदर्शन कैसा रहा है?

उत्तर- बेहद शानदार रहा है। हमारे करीब 60 केंद्र चल रहे हैं। इनमें से 50 में तो बेहद छोटे-छोटे स्टार्टअप निकलकर सामने आए हैं। इन केंद्रों में हर साल डेढ़ सौ से 200 कंपनियां इंक्यूबेट होती हैं, जहां स्टार्टअप केलोग आते हैं, सीट लेते हैं, किराया देते हैं, काम करते हैं और आगे बढ़ते हैं।

प्रश्न- आईटी क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को एआई, मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्र में पारंगत करने के लिए भी कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे या आने वाले हैं?

उत्तर- हम इस तरह का कोई प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित नहीं करते, बल्कि स्टार्टअप को टूल या टेक्नोलॉजी पर काम करने का मौका देते हैं। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, हिचक मिटती है। यही नहीं, कॉलेज में पढ़ रहे युवा भी इस टूल या टेक्नोलॉजी पर काम कर सकते हैं। इसके लिए कोई कॉलेज अनुरोध करता है तो उसके विद्यार्थियों को हम अपने यहां टूल पर काम करने का मौका देते हैं। यह अनुरोध यदि किसी एसोसिएशन की तरफ से आता है तो हम उन्हें भी ऐसी सुविधा प्रदान करते हैं।

प्रश्न- अक्सर कहा जाता है कि स्टार्टअप कोई आइडिया कॉपी करके आगे नहीं बढ़ सकते। क्या भारत में आइडिया के स्तर पर दिक्कत है?

उत्तर- सही कहा आपने, कोई दूसरों के आइडिया को कॉपी करके आगे नहीं बढ़ सकता है। मेरा मानना है कि यहां आइडिया की कोई कमी नहीं है। चाहे सामान बेचना हो, सेवा प्रदान करना हो, सबमें ढेरों आइडिया सामने आ रहे हैं। बस जरूरत है उसे अमलीजामा पहनाने की। 
 

महामारी के दौरान भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का प्रदर्शन अच्छा: महानिदेशक एसटीपीआई

Date: December 21, 2020

महामारी के दौरान भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का प्रदर्शन अच्छा: महानिदेशक एसटीपीआई


कोहिमा, 21 दिसंबर (भाषा) भारतीय सॉफ्टवेयर प्रौद्योगिकी पार्क (एसटीपीआई) महानिदेशक ओमकार राय ने सोमवार को कहा कि कोविड-19 महामारी के दौर में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग का प्रदर्शन अच्छा रहा है। राय ने ई-नागालैंड शिखर सम्मेलन 2020 में कहा कि इस मुश्किल वक्त में भी सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने अच्छा काम किया है। इसकी वजह भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की मजबूत बुनियाद और बदलाव को स्वीकार करने की क्षमता है। इस सम्मेलन का आयोजन राज्य सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी और संचार विभाग ने किया था। उन्होंने कहा कि भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों के संदर्भ में अच्छा काम किया है। ‘‘नगालैंड की दक्षिणपूर्व एशिया के लिये आईटी केंद्र बनने की आकांक्षा पूरी तरह से जायज और राष्ट्र तथा एसपीटीआई की महत्वकांक्षा के अनुरूप है। राय ने यहां एसटीपीआई केंद्र और नेटवर्क सेंट्रिक सेंटर शुरू करने के लिये जगह उपलब्ध कराने को लेकर राज्य सरकार की पहल की सराहना की।

देहरादून मे एसटीपीआई इन्क्यूबेशन सेंटर का शिलान्यास, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जताई अपार संभावनाएं

Date: November 28, 2020

देहरादून मे एसटीपीआई इन्क्यूबेशन सेंटर का शिलान्यास, केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जताई अपार संभावनाएं

युवा सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए उत्पादों को विकसित करें, सरकार उन्हें 25 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद देगी। शुक्रवार को सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया, एसटीपीआई के इंक्यूबेशन सेंटर का वर्चुअल शिलान्यास करते हुए यह बात केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कही। देहरादून में इस सेंटर के शिलान्यास कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और केंद्रीय राज्यमंत्री संजय धोत्रे भी शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हम छोटे शहरों में युवा अन्वेषकों को उन्नत्तिशील उत्पादों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और उन्हें 25 लाख रुपये तक वित्तीय सहायता प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस बात पर बल दिया कि यह केंद्र क्षेत्र के युवाओं के लिए स्टार्टअप्स और बॉल्स्टर रोजगार की संभावनाओं के लिए वांछित सुविधा प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि आईटी पार्क ने 2019-20 में 150 करोड़ रुपये का व्यापार किया है। इससे 2500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। एसटीपीआई इन्क्यूबेशन केन्द्र से स्टार्टअप को और अधिक बढ़ावा मिलेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि एसटीपीआई देहरादून इन्क्यूबेशन केन्द्र उत्तराखंड में निवेश को आकर्षित करने में मददगार होगा। इससे राज्य में रोजगार के नए अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि भारत नेट-2 के प्रसार से उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। भारत नेट फेज-2 परियोजना के तहत दो हजार करोड़ रुपये की योजना से 5991 ग्राम पंचायतों में इंटरनेट पहुंचाया जाएगा। ड्रोन एप्लीकेशन के क्षेत्र में भी उत्तराखंड में अनेक ड्रोन के पायलट तैयार हो रहे हैं। जिसका आने वाले समय में बहुत लाभ होगा।

लखनऊ: STPI ने वेबिनार के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप से की आवेदन करने की अपील

Date: September 06, 2020

लखनऊ: STPI ने वेबिनार के माध्यम से यूपी के स्टार्टअप से की आवेदन करने की अपील

सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ़ इंडिया (STPI)-लखनऊ ने नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम (एनजीआईएस) के बारे में दूसरे आउटरीच वेबिनार का आयोजन करके प्रदेश के स्टार्ट अप्स को जागरूक किया। भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) के तत्वावधान में नेक्स्ट जनरेशन इनक्यूबेशन स्कीम (NGIS) तैयार की है जो कि एसटीपीआई द्वारा कार्यान्वित की जा रही है।

एनजीआईएस की दृष्टि एक सॉफ्टवेयर प्रोडक्ट राष्ट्र के रूप में भारत के उदय को चलाने के लिए है ताकि देश को विकास, नवाचार और कुशल सॉफ्टवेयर उत्पादों के विकास, उत्पादन और आपूर्ति में एक वैश्विक मानक बनाया जा सके, जैसा कि सॉफ्टवेयर उत्पादों पर राष्ट्रीय नीति-(NPSP) – 2019 में लागू किया गया है। एनजीआईएस योजना,  लखनऊ व प्रयागराज को मिलाकर देश के कुल 12 स्थानों के साथ शुरू किया गया है।

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नेक्स्ट जेन स्टार्टअप चैलेंज कॉन्टेस्ट- चुनौती द्वारा स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स के उत्पादों और समाधानों की तलाश करने और निम्नलिखित फोकस क्षेत्र पर महामारी की स्थिति के दौरान आने वाली समस्याओं/समाधान को तलाशने के लिए स्टार्ट अप्स से आवेदन आमंत्रित किया है :

एडूटेक, एग्रीटेक, फिनटेक
आपूर्ति श्रृंखला, रसद और परिवहन प्रबंधन
इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिमोट मॉनिटरिंग
मेडिकल हेल्थकेयर, नैदानिक, निवारक और मनोवैज्ञानिक देखभाल
नौकरियां और कौशल भाषाई उपकरण
प्रौद्योगिकी चयनित स्टार्टअप / आवेदक को रु. 25 लाख तक की सीड फंडिंग की पेशकश की जाएगी और प्री-इनक्यूबेशन प्रोग्राम में चुने गए स्टार्टअप को रु. 10,000 / – प्रति माह का भुगतान भी किया जाएगा। वेबिनार में लगभग 250 स्टार्टअप/आईटी कंपनियों में भाग लिया गया, जिन्हें प्रौद्योगिकियों केंद्रित अपने नवीन विचारों को प्रस्तुत करने के लिए प्रोत्साहित किया गया और ‘ऑल इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज / हैकाथॉन’ में भाग लेकर और इसका हिस्सा बनकर एनजीआईएस के लाभार्थी बन सकते हैं। जिससे सॉफ़्टवेयर उत्पाद राष्ट्र के निर्माण का हिस्सा बन सकें।

इस अवसर पर बोलते हुए, सुबोध सचान, निदेशक स्टार्टअप एंड इनोवेशन प्रमोशन और सीईओ, एसटीपीआई नेक्स्ट इनिशिएटिव्स, ने एनजीआईएस और नेक्स्टजेन स्टार्टअप चैलेंज कॉन्टेस्ट (CHUNAUTI) के बारे में विस्तार से बताया, एनजीआईएस के तहत एक ऑनलाइन चैलेंज शुरू किया गया है ताकि स्टार्टअप और इनोवेटर्स के उत्पादों और समाधानों की तलाश की जा सके, महामारी की स्थिति के दौरान और बाद में।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में समग्र स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र बहुत जीवंत है और एसटीपीआई #STPICoEs & #STPINGIS के माध्यम से इसे और मजबूत करने के लिए काम कर रहा है, 120 करोड़ की सीड फंडिंग, एनजीआईएस के माध्यम से अगले 3 वर्षों के लिए है, खासकर टियर 2 शहरों में। उन्होंने यह भी बताया कि एक जबरदस्त और स्वागतजनक प्रतिक्रिया है कि अभी तक टियर 2 शहरों के लगभग 5000 आवेदकों ने एनजीआईएस में रुचि दिखाई है।


 
एसटीपीआई-लखनऊ के अपर निदेशक श्री सूर्य कुमार पट्टनायक ने लखनऊ व प्रयागराज की विभिन्न विशेषताओं और क्षमता पर विस्तार से प्रकाश डाला और स्टार्टअप्स और इनोवेटर्स से नेक्स्ट जेन चैलेंज में बड़े पैमाने पर भाग लेने और एनजीआईएस के लाभों का लाभ उठाने का आग्रह किया। एनजीआईएस लाभार्थियों को उन सीओई से जोड़ा जाएगा जो डोमेन-विशिष्ट समस्याओं को हल करने के लिए सेटअप किए जा रहे हैं या पहले से ही हैं।

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डॉ. नीतेश सक्सेना, असिस्टेंट प्रोफेसर कार्डिफ यूनिवर्सिटी , यूनाइटेड किंगडम ने व्यक्त किया कि हमें समाज की समस्याओं को हल करने की आवश्यकता है, हालांकि स्टार्टअप और रोजगार के अवसर भी पैदा करना चाहिए। हेल्थकेयर प्रदाता तेजी से एआई, प्रिडिक्टिव एनालिटिक्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, और इस स्पेस में स्टार्टअप के अवसर बहुत अधिक हैं। जब हम बहुत कुछ कर रहे हैं, तो हमें परिणामों पर ध्यान देना चाहिए और स्टार्टअप को वांछित लाभ प्राप्त करना सुनिश्चित करना चाहिए।

प्रवीण कुमार, डी जी एम्, यू पी एल सी  ने कहा कि यूपी में स्टार्टअप्स के लिए पॉलिसी में कई वित्तीय लाभ हैं जैसे कि भत्ता भत्ता, बीज पूंजी, पेटेंट लागत प्रतिपूर्ति और event में भागीदारी और महिलाओं, दिव्यांगजन, ट्रांसजेंडर या ईडब्ल्यूएस लोगों द्वारा स्थापित स्टार्टअप के लिए 50% अधिक लाभ। रुपये की राशि के साथ यूपी स्टार्टअप फंड। निधि के रूप में सिडबी के साथ 1000 करोड़ रुपये स्टार्टअप्स को आर्थिक रूप से समर्थन देने के लिए स्थापित किए गए हैं।

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प्रवीण कुमार द्विवेदी, संयुक्त निदेशक एसटीपीआई लखनऊ ने योजना एवं स्टार्टअप चैलेंज के बारे में विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया एवं कहा कि STPI NGIS टियर -2 शहरों में 300 स्टार्टअप का पोषण करने का लक्ष्य बना रहा है और वांछित समर्थन पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके योजना से 50 पेटेंट की उम्मीद कर रहा है| उन्होंने कहा कि एनजीआईएस एक फ्यूचरिस्टिक इन्क्यूबेशन स्कीम है, जो एक कॉमन प्लेटफार्म के तहत विभिन्न एसटीपीआई इनक्यूबेशन सुविधाओं के माध्यम से पुरे भारत वर्ष में 300 स्टार्ट अप के लिए नेटवर्किंग, मेंटरशिप , इंटर्नशिप के द्वारा होनहार स्टार्ट अप को सक्षम बनाने में कारगर सिद्ध होगी|

कार्यक्रम का संचालन एसटीपीआई प्रयागराज के अपर निदेशक श्री निखिल राय ने किया एवं कहा कि  इस चुनौतीपूर्ण समय में, स्टार्टअप्स वर्तमान चुनौतियों का समाधान करने के लिए अभिनव उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही उन्होंने स्टार्टअप को चुनौती चैलेंज में प्रतिभाग करने के लिए अपील की और बाते कि अंतिम तारिख 07 सितम्बर तक इच्छुक आवेदक अपना आवेदन कर सकते हैं |

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